डीआरआई ने अडानी की फर्मों को गलत तरीके से क्लीन चिट दीः कस्टम विभाग

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मुंबई। कस्टम विभाग का कहना है कि डायरेक्टर ऑफ रेवेन्यू इंटैलीजेंस (डीआरआई) के फैसला लेने वाले एक अधिकारी ने कोई 400 करोड़ रुपए के साजो-सामान के मूल्यांकन केस में अडानी ग्रुप की दो फर्मों के विरुद्ध सभी सुनवाइयों को रद्द करने का जो फैसला लिया है, वह गलत और गैर-कानूनी है। 28 नवम्बर को मुम्बई में कस्टम, एक्साइज और सर्विस टैक्स अपील ट्रिब्यूनल (सीईएसटीएटी) के पास दायर की गई अपील में दावा किया गया है कि फैसले से संबंधित जो आदेश पास किया गया है, उसमें कई खामियां हैं और यह आदेश बिना सोचे-समझे दिया गया है। बता दें कि 22 अगस्त-2017 को डीआरआई की एजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने अडानी शक्ति महाराष्ट्र लिमिटेड (एपीएमएल) व अडानी शक्ति राजस्थान लिमिटेड (एपीआरएल) विरुद्ध लगे सभी आरोपों को रद्द कर दिया था। इन दोनों कंपनियों पर आरोप यह है कि इन्होंने कर बचाने के लिए अपने साजो- सामान का मूल्यांकन कम किया है। बता दें कि यह वह सामान है, जो एपीएमएल और एपीआरएल ने वर्ष 2009 और 2010 में निर्यात किया था। यह सामान चीन और दक्षिण कोरिया की कंपनियों से खरीदा गया था, जबकि अफ्रीकी देशों को बेचा गया था। इस सामग्री का कम मूल्यांकन इसलिए बताया गया कि कंपनियां कर बचाना चाहती थीं। डीआरआई इसी मामले की सुनवाई कर रहा था और आरोप है कि उसके अफसर ने इन कंपनियों के खिलाफ चल रही सुनवाई को रद्द कर दिया, गैर कानूनी तरीके से। कस्टम विभाग ने डीआरआई के फैसले के खिलाफ सीईएसटीएटी में अपील दायर कर दी है।

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