छोटे कारोबारियों को नहीं मिल रहा क्रेडिट सपोर्ट

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नई दिल्‍ली:एजेंसी। नोटबंदी से शुरू हुई छोटे कारोबारियों की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। छोटे कारोबारियों को क्रेडिट सपोर्ट नहीं मिल रहा है। मिनिस्‍ट्री ऑफ माइक्रो, स्‍मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) की रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी के बाद से ही एमएसएमई सेक्‍टर को मिलने वाला क्रेडिट सपोर्ट लगातार कम हो रहा है। रिपोर्ट बताती है कि पिछले फाइनेंशियल ईयर के पहले सात माह के मुकाबले इस साल अप्रैल से अक्‍टूबर के बीच 50 फीसदी कम क्रेडिट प्रपोजल अप्रूव हुए। जिसे एक बड़ी गिरावट माना जा रहा है।
 क्‍या हैं आंकड़ें 
मिनिस्‍ट्री ऑफ एमएसएमई के ताजा आंकड़ें बेहद दिलचस्‍प हैं। मिनिस्‍ट्री की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2017 से अक्‍टूबर 2017 के दौरान मिनिस्‍ट्री ने 161696 क्रेडिट प्रपोजल अप्रूव किए। जबकि इसी अवधि के दौरान साल 2016 में 305903 प्रपोजल अप्रूव हुए। अकेले अक्‍टूबर 2016 में मिनिस्‍ट्री ने 24384 प्रपोजल अप्रूव किए थे, जबकि इस साल अक्‍टूबर में केवल 14597 प्रपोजल अप्रूव हुए। यानी कि पिछले साल के मुकाबले इस साल लगभग आधे प्रपोजल को अप्रूवल मिला है।
नोटबंदी का है असर 
जानकार मानते हैं कि नोटबंदी की वजह से छोटे कारोबारियों को क्रेडिट सपोर्ट मिलना कम हो गया है। इससे उन पर दोहरी मार पड़ी है। आंकड़ें भी इसकी तसदीक करते हैं।
 फाइनेंशियल ईयर 2016-17 में अक्‍टूबर 2016 तक हर महीने औसतन 43700 क्रेडिट प्रपोजल अप्रूव हुए, लेकिन फरवरी तक यह औसत 37700 तक पहुंच गई। फरवरी 2017 में केवल 19127 क्रेडिट प्रपोजल अप्रूव हुए। और यदि नवंबर 2016 से अक्‍टूबर 2017 के बीच का औसत देख जाए तो हर माह औसतन 24600 क्रेडिट प्रपोजल अप्रूव हो रहे हैं। इस 11 महीने में केवल 270923 क्रेडिट प्रपोजल अप्रूव हुए।
 क्‍या है क्रेडिट सपोर्ट स्‍कीम 
 केंद्र सरकार द्वारा सेल्‍फ इम्प्‍लॉयमेंट को बढ़ावा देने के लिए क्रेडिट सपोर्ट स्‍कीम चलाई जाती है। इसका मकसद बेरोजगारों और अपना बिजनेस शुरू करने वाले लोगों को लोन लेने में सपोर्ट किया जाता है। इस स्‍कीम के तहत लोन लेने वालों को सरकार सब्सिडी भी देती है और आवेदक को किसी तरह की कोलट्रल सिक्‍योरिटी भी नहीं देनी होती।

क्‍या है वजह
प्रमुख एसएमई संगठन आईएम एसएमई ऑफ इंडिया के चेयरमैन राजीव चावला ने मनीभास्‍कर को बताया कि नोटबंदी के बाद से इकोनॉमी घटी है और बिजनेस कम हुआ। इस वजह से छोटे कारोबारी कारोबार शुरू करने के लिए आगे नहीं आए। दूसरी बड़ी वजह है कि बैंकों का नकारात्‍मक रवैया। सरकार के दबाव के बावजूद बैंक बिना कोलट्रल सिक्‍योरिटी के लोन नहीं देते। 31 दिसंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि छोटे कारोबारियों को 2 करोड़ रुपए तक के लोन के लिए कोई कोलट्रल सिक्‍योरिटी नहीं देनी होगी, लेकिन 10 माह हो चुके हैं और अब तक हमें कोई भी ऐसा कारोबारी नहीं मिला, जो कह दे कि उसे बैंक ने बिना सिक्‍योरिटी के 2 करोड़ रुपए का लोन दिया है।

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